हम अब भी अपने समाज में हुसैनी आंदोलन को ख़त्म शुदा नहीं समझते। हम अब भी कर्बला और आशूरा के रास्ते पर चल रहे हैं। हमारी क़ौम को मुसलसल यह महसूस करना चाहिए कि वह कर्बला के सहरा और नैनवा के मैदान में मौजूद है।
शहीद इमाम ख़ामेनेई
12 अक्तूबर 1984
29/06/2026