(आशूरा) ऐसे सूरज की तरह है जो कभी नहीं डूबता, वह हमेशा से था, आज भी मौजूद है और आगे भी रहेगा। यह प्रकाश और अंधकार के बीच संघर्ष, सत्य और असत्य की जंग, सज्जनता के मुक़ाबले में पस्ती और घटियापन की एक जीवित, वास्तवकि और स्पष्ट तस्वीर है।
शहीद इमाम ख़ामेनेई
19 अक्तूबर 2016
21/06/2026