इस्लामी मारेफ़त की बुनियादों को हिलाया न जा सके

हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के ज़माने में वक़्त ने उन्हें एक मौक़ा दिया और हज़रत यह काम करने में कामयाब हुए कि समाज में सही इस्लामी मारेफ़त की बुनियादें इतनी मज़बूत हो जाएं कि फिर फेरबदल के ज़रिए उन बुनियादों को हिलाया न जा सके। यह हज़रत इमाम जाफ़र सादिक अलैहिस्सलाम का कारनामा था।

इमाम ख़ामेनेई

8 नवम्बर 2005

14/10/2022

इस्लामी मारेफ़त की बुनियादों को हिलाया न जा सके