औरत होने पर फ़ख़्र

औरत इस्लामी माहौल में तरक़्क़ी करती है और उसकी औरत होने की पहचान बाक़ी रहती है। औरत ‎होना औरत के लिए फ़ख़्र की बात है। यह औरत के लिए फ़ख़्र की बात नहीं है कि हम उसे ज़नाना ‎माहौल, ज़नाना ख़ुसूसियतों और ज़नाना अख़लाक़ से दूर कर दें और गृहस्थी को, बच्चों की परवरिश ‎को, शौहर का ख़्याल रखने को उसके लिए शर्म की बात समझें।

इमाम ख़ामेनेई

12 सितम्बर 2018

14/01/2023

औरत होने पर फ़ख़्र