इस किताब की अहम व बुनियादी बात यह है कि जब दर्द, तकलीफ़, हिंसा और क़ैद की बात होती है तब भी उम्मीद इन आत्मकथाओं का कीवर्ड और आत्मा होती है। हम साफ़ तौर पर देखते हैं कि क़ैदियों के घर वाले और ख़ुद उनके घऱ वालों की मुसीबतें और दुख बयान करने से ज़्यादा मोहब्बत और उम्मीद की बात की जाती है और यह बात साफ़ महसूस होती है।
13/10/2026