लेकिन किताब "ख़ूने दिली के लाल शुद" हमें उन बरसों में ले जाती है जब कुछ भी निश्चित नहीं था एक जवान धार्मिक स्टूडेंट, जिसे किताब पढ़ने का शौक़ है शेर और साहित्य से लगाव है, पढ़ाई करता और स्पीच देता है। जो अवाम से संपर्क रखता है और धीरे धीरे अपने दौर के राजनैतिक और सामाजिक मामलों में सक्रिय होता है। यह दूरी जो उस जवान और बाद में होने वाली उस हस्ती के बीच है, शायद इस किताब का सबसे अहम हिस्सा होगा।
12/10/2026