हमारे अज़ीज़ रहबर को सांस्कृतिक नज़र से किताब और किताब पढ़ने के संबंध में बहुत चिंता थी। वह कहा करते थे कि कोई चीज़ किताब की जगह नहीं ले सकती यानी उनकी नज़र में, किताब सबसे अहम सांस्कृतिक रचना है। उनके घर में किताब पढ़ने का माहौल था और वाक़ई वह भी किताब पढ़ने में अभ्यस्त थे।
06/09/2026