पैग़म्बरे इस्लाम (स) की नज़र में शिथिलता मना है!

मैं कहना चाहता हूं: ऐ लोगो! जो भी जहाँ है, उठ खड़ा हो, एक क़दम आगे बढ़े; पैग़म्बरे इस्लाम के धर्म और संस्कृति में ठहराव नहीं है, सुस्ती नहीं है, रुकना नहीं है, पीछे की ओर पलटना नहीं है। निराशा का कोई स्थान नहीं है; हमारे पैग़म्बर ने निराशा के ख़िलाफ़ संघर्ष किया। मुसलमान उम्मीद से भरा होता है। 

30/08/2026

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