आज हमारे पास इस्लामी उम्मत नहीं है। इस्लामी देश तो बहुत हैं। दुनिया में लगभग 2 अरब मुसलमान हैं लेकिन इन्हें “उम्मत” का हिस्सा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उनमें समन्वय नहीं है, क्योंकि उनकी दिशा एक नहीं है। हम एक दूसरे के साथ मिल कर, एक दूसरे का हाथ पकड़ कर, एक दूसरे के संसाधनों से लाभ उठा सकते थे, एक दूसरे की मदद कर सकते थे, एक “यूनिट” बन सकते थे, यह “यूनिट” आज दुनिया की हर ताक़त से ज़्यादा ताक़तवर हो सकती थी।
29/08/2026