आशूर के विषय को, इमाम हुसैन के मक़सद को इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम ने दुनिया में फैलाया; यानी अहलेबैत के मत के अनुयाइयों के बीच आशूरा की घटना इस बात का सबब बनी कि शिया, पूरे इतिहास में ज़ुल्म के ख़िलाफ़ संघर्ष के ध्वजवाहक के बतौर पहचाने जाएं।
हम सब को इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम से यह सबक़ मिला है कि ऐ मुसलमानो! जेहाद से हरगिज़ न थको, कभी ग़ाफ़िल न हो क्योंकि दुश्मन जाग रहा है और अलग अलग शक्लों, अलग अलग भेस में, अलग अलग मेक-अप में सामने आता है। गहरी नज़र रखो, दुश्मन को पहचानो और दुश्मन से लड़ने का तरीक़ा सीखो और अली बिन मूसा अर्रेज़ा की तरह शुरू से आख़िर तक संघर्ष को जारी रखिए।
शहीद इमाम ख़ामेनेई
24 नवम्बर 1984 और 24 अगस्त 2025
14/08/2026