मेरे पिता की यहाँ आने, पैदल मार्च करने और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के रौज़े का दर्शन करने की गहरी इच्छा थी लेकिन वो अमरीकी बमबारी में शहीद हुए। वो रोज़े की हालत में कुफ़्फ़ार के हाथों शहीद हुए। अल्लाह उन पर रहमत करे। उन्होंने सत्य का साथ दिया। तमाम शियों का बचाव किया, बल्कि पूरी दुनिया का बचाव किया; इंशा अल्लाह क़यामत के दिन वो हमारी शिफ़ाअत करेंगे।
03/08/2026