इसी अल्लाहो अकबर के हथियार के ज़रिए, ईरान की सरज़मीन पर सद्दाम की बासी सरकार के हमले के बाद, अपनी जान की परवाह न करने वाले ग़ैरतमंद मुजाहिदों और जवानों ने, आठ साल के पाकीज़ा डिफ़ेंस की शौर्यगाथा लिखी और पूरब और पश्चिम की सभी ताक़तों की ओर से बासी शासन के हर तरह के सपोर्ट के बावजूद, उसे उसकी औक़ात बता दी।
30/05/2026