नमाज़ और इबादत में, ध्यान और ग़ौर व फ़िक्र की अहमियत
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ऐ अबूज़र! दो रकत नमाज़ ध्यान और ग़ौर व फ़िक्र के साथ, उस रात भर की नमाज़ से बेहतर है जिस में दिल ग़ाफ़िल हो।
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ऐ अबूज़र! दो रकत नमाज़ ध्यान और ग़ौर व फ़िक्र के साथ, उस रात भर की नमाज़ से बेहतर है जिस में दिल ग़ाफ़िल हो।
22/02/2026